Thoughts on economics and liberty

Category: Sone Ki Chidiya movement

Partial list of participants at the National Reform Summit at Patanjali in April 2013

Came across this list in my records. I needed it for something. Putting it out my blog for easier reference in the future. This is a PARTIAL list. Many others are not listed here.

Bhaleram BeniwalRetired Principal Rashtriya Adhyaksh Jat Mahasangh (Regd.)
G. LeelaHyderabad
Hem Raj JainVeleraus of Ivelia
Amar G. ChoudharyB.Sc. & C.A.
Ca Atul DeshmukhTrustee Arthkranti
B.S. BunghaVishva Shanti Party
Vardan KabraFTI
Prasoon Kumar MishraAdvocate, Supremen Court of India President, “Global Rights & Justice Welfare Society” President, Vishva Shakti Party
Dr. Pradeep Kumar Saxena (M.Tech., Ph.D. MBA)Professor Computer Science, Management
Dr. Natthu SinghKendriya Lekha Nirikshak Bharat Swabhiman, Patanjali
Dipender SekhonFTI
Vivek GargBJP External Affair Cell, Head Ofice (Africultural Exporter)
Bhushan PatilArthakranti
Ashish Roy Loksatta Party
Gajendra DewanganWorking in the field of farming
Mrs. PreetiWorking in the field of Yoga & Woman Empowerment
Dr. Wange Harish ChandranSurgical Practice, Political, Social Aesthetics
Acharya PankajVyavastha Parivartan Manch
Chabbil Singh SisodiyaVyavastha Parivartan Manch
Pramod VatsalyaVyavastha Parivartan Manch
Suneeta DhariwalFTI
Dr. Mahinder Kumar
Indra SinghalPYP Houston U.S.A.
Shantanu BhagwatFTI
Dr. Jaideep AryaPatanjali Yog Peeth Bharat Swabhiman Nyas
Anurag KejriwalLok Satta Party
B.B. TewariLok Satta Party
C. Dinakaran BoseLok Satta Party
Ram Ratan Sharma, former MLAPermanent Avas Patanjali
Kunwar Kamal BhaiiIndian Eternal Society
Gauri ShankarBharat Swabhiman
Dr. Surender SangwanB.S.T.
Ramesh GuptaNRI, Bharat Sudhar Manch
Dr. Sarvadanand AryaFormer Vice Chancellor, MDU, KU & HAU ex. World Bank Executive
Pradeep MathurYuva Bharat Delhi
Ram Narayan ChaudharyNagaur (Rajasthan)-342902
Anirudh Dhoundiyalstudent
Shivam DhoundiyalRudrapur
Kapil GuptaCEO-OMLogic
Ruchi JayaswalHR-OMLogic
Neha JainCS-OMLogic
Ashutosh PhalkeArthakranti
PankajVolunteer with Bharat Swabhiman(Trust)
HarisharanVolunteering with Bharat Swabhiman, Haridwar.
Maj. Gen. Narendra Bahadur (Veteran)Retired in 2006 from army, convenor SSSM etc. Member BST Andolan Samiti.
Srijan BandyopadhyayCentre for Civil Society
Arvind KamranFTI
Navendra Singh AryaJAT Mahasabha of India (Delhi Pradesh)
Narender Singh DabasKisan Panchayat Delhi, Bharat Swabhiman
Dr. Harpal S. SangivanKisan Rights “AGRICOS”
Mukesh SharmaBusiness Enterpreneur
Dr. Robin MalikBharat Uday Mission Youth for equality
Surveer GulleriaBharat Swabhiman Andolan
Ran Singh ShokeenPresident Delhi State Jat Aarakshan Sangharsh & former retired Asst. Commn. Of Police.
Dr. Kamal Kishore SharmaFTI
K.K. VermaFTI
Ramvir ShresthJournalist A to Z TV, Delhi
Ramesh ChaubeyLok Swaraj Manch Bihar, Chattisgarh
Rishi DwivediSelf Employed
Bajrang MuniBusiness, Social Worker
Rajendra ShuklaSocial Worker
Nagesh Kumar SinghEngineer, Govt. Service
Dilip KumarBharat Swabhiman

 

 

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A preliminary draft blueprint for the Abhinav Bharat Abhiyan (अभिनव भारत अभियान)

I mentioned that on 6 October 2018 a new movement for reform, called Abhinav Bharat Abhiyan (अभिनव भारत अभियान), was launched. Around 100 farmer leaders from north India had assembled.

The next step is to prepare the outline of a blueprint for reform. I’m drafting my inputs for this blueprint – below:

Blueprint for New India

अभिनव भारत का यह नक्शा हमारी व्यवस्था को पूर्ण रूप से बदलने के लिए बनाया जा रहा है.

इस अभिनव भारत का नक्शा बहुत ही सरल है, क्योंकि यह हमारी संस्कृति के मूल तत्वों से जुड़ा हुआ है. यही सिद्धांत सारे विश्व में अपनाए गए हैं जहाँ भी कोई देश प्रगति कर रहा है. जिस प्रकार से विज्ञानं भारतीय नहीं होता,उसी प्रकार से अर्थशास्त्र या राजनीती भारतीय नहीं होती. जो भी सिद्धांत श्रेष्ठा होते हैं वे सारे विश्व में अपनाये गए हैं. हमारे पूर्वजों ने शोध के पश्चात अर्थशास्त्र व् राजनीती के कुछ मूल तत्वों को खोजा था, जो सारे विश्व भर में लागु हो रहे हैं – परन्तु भारत में नहीं.

भारतीय संस्कृति के कुछ मूल सिद्धांत

भारतीय संस्कृति में कुछ साधारण बातें हैं जो जो आज़ाद भारत की व्यवस्था में सम्मिलित नहीं हुईं, और जिनको हम सम्मिलित करना चाहते हैं.

1. जहां का राजा हो व्यापारी वहां की प्रजा हो भिखारी

हमारे यहां एक कहावत है कि “जहां का राजा हो व्यापारी वहां की प्रजा हो भिखारी”. यह कहावत बहुत महत्व रखती है क्योंकि इसमें राजनीती का निचोड़ है. राम राज्य में राजा केवल सुरक्षा और न्याय की व्यवस्था करता है. रामायण में राम कोई भी व्यापार नहीं चलाते थे.

केवल  राम नाम जपने से भारत का कुछ नहीं होने वाला. राम राज्य के मूल तत्व क्या होते हैं यह हमें पहले समझना पड़ेगा.

हमारे देश का दुर्भाग्य यह हुआ कि 1947 के बाद हमारी सरकारों ने व्यापार का धंधा शुरू कर दिया. आज तक हमारी सरकारें व्यापारी बनी हुई हैं. यह सरकारें बैंक, होटल, एयरलाइन, कारखाने और अन्य किस्म के व्यापार चलाती हैं.

और जो काम सरकार को करना चाहिए वह नहीं करती. यहां कोई जवाबदेही नहीं है और सरकारी कर्मचारी देश को लूटने में मग्न है.

हमने एक विचित्र प्रकार की सरकार बना कर रखी है जहां पर सरकारी कर्मचारियों की नौकरी 35 साल तक पक्की रहती है और वे चाहे कुछ भी कर ले, नौकरी से नहीं निकले जा सकते. यह समझ नहीं आता कि हमने सरकारी नौकरों को सिर पर क्यों चढ़ा कर रखा हुआ है?

इसी वजह से हमारे देश की पुलिस जनता की रक्षा करने के बजाए, उन पर अत्याचार करती है. और न्याय में इतनी देरी हो जाती है कि जनता कोअपने जीवन के अंतर्गत न्याय ही नहीं मिलता.

2. शुभ लाभ

भारत में किसी भी दुकान में जाएं तो लक्ष्मी देवी के नीचे “शुभ लाभ” और स्वास्तिक बना रहता है. यह इसलिए होता है क्योंकि हमारी संस्कृति में लाभ को शुभ माना जाता है और नुकसान को अशुभ.

परंतु नेहरू लाभ को अशुभ मानते थे और उन्होंने समाजवाद को अपनाया जिसमें सरकार ही महत्वपूर्ण व्यापार (commanding heights of the economy) करती है और लाभ को अशुभ माना जाता है. उनकी बेटी इंदिरा गाँधी ने इस बात को और फैलाया और आज तक सरकार बैंक भी चलाती है. ये बैंक भारत के गरीब नागरिक को लूटने का मूल यन्त्र बन गए हैं, और हर साल सर्कार जनता के कर (tax) का पैसा इन बैंकों में उड़ेलती पाई जाती है.

सरकार हमारी नौकर होती है. सरकार का व्यापर से कोई मतलब नहीं होना चाहिए, उसको लाभ से कोई मतलब नहीं होना चाहिए. भारत की जनता अपने ग्राहक की सेवा करके ही मुनाफा पा सकती है. इससे वस्तुओं की कीमतें गिरती हैं और उनके किस्म, गुण, लक्षण व् स्वरूप निखरते हैं.

3. अंधेर नगरी चौपट राजा: टका सेर भाजी, टका सेर काजा

हमारी परंपरा के सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही होती थी. पर जवाबदेही पाने के कुछ नियम होते हैं. कौटिल्य के अर्थशास्त्र में लिखा है कि सबसे ऊंचे दर्जे के कर्मचारी और नीचे दर्जे के कर्मचारी के वेतन में 800 गुना अंतर होना चाहिए. यह भी लिखा है कि उच्च दर्जे के कर्मचारी यदि निर्धारित काम ना करें तो उनको नौकरी से तुरंत बर्खास्त करना होगा.

जिम्मेदारीपूर्ण पदों के लिए वेतनमान भी उसी अनुसार होने चाहिए. उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों का वेतन अपेक्षाकृत कम होने से जवाबदेही और ईमानदारी दोनो का ही निर्धारण होना मुश्किल हो जाता है.

परंतु भारत की समाजवादी व्यवस्था में उच्च और नीचे के कर्मचारियों के वेतन में कोई ज्यादा अंतर नहीं है, और उच्च कर्मचारियों को (यानी कि IAS ऑफिसर्स को) नौकरी से नहीं निकाला जा सकता.

4. विनाशकाले विपरीत बुद्धि

हमारे भारत की संस्कृति की जो परंपराएं हैं वही आजकल के आधुनिक अर्थशास्त्र में पाई जाती हैं, परंतु भारत में परंपरा हम भूल गए और सबसे पीछे हो गए हैं . इतनी देर में बाकी देश इसी परंपरा के निचोड़ की, या दिशा की, पालन करते हुए बहुत आगे निकल चुके हैं.

नेहरू और बाकी समाजवादियों (जिनमें आज की सरकार का उल्लेख करना पढ़ेगा) की विपरीत बुद्धि ने भारत की दुर्गति इस प्रकार बना दी है कि यहां अब जीना ही मुश्किल हो गया है.

विपरीत बुद्धि से सर्वनाश होना निश्चित है – यह भी हमारी परंपरा मैं कहना है.

अब हम इस समाजवादी विपरीत बुद्धि को छोड़ अपनी परंपरा की मुख्य तत्वों को फिर अपनाएं और नए भारत का निर्माण करें.

अभिनव भारत की सरकार क्या करेगी और कैसे करेगी

सरकार क्या काम करे यह नए भारत के नक़्शे का पहला बिंदु होगा. अभिनव भारत की सरकार जनता की नौकर बनकर वही काम करेगी जो जो सरकार के लिए जायज़ हो और सौंपा गया हो – यानी हमारी सुरक्षा और न्याय, और शायद कुछ सड़के बनाना. उसके अलावा सारे काम जनता खुद करेगी. और सरकार को जो सौंपा जाये उसके लिए वह पूरी तरह जवाबदेह होगी.

अभिनव भारत की सरकार कभी व्यापर नहीं करेगी.

अभिनव भारत में हर गरीब को सरकार की तरफ से social insurance की हैसियत से कुछ सीमित संसाधन मिलेंगे जिससे वह frugal condition में जी पाये, और उनके बच्चों को अच्छे स्कूलों में जाने का अवसर मिलें . सरकार खुद स्कूल इत्यादि नहीं चलाएगी, गरीबों को school voucher मिलेंगे.

इसी प्रकार, सरकार हमारी सेहत का ध्यान नहीं करेगी, ना ही अस्पताल चलाएगी, परंतु जो गरीब से गरीब है उसके लिए social insurance की तरफ से कुछ health voucher का बंदोबस्त करेगी .

अभिनव भारत की सरकार जनता की नौकर की हैसियत से जनता को, यानि की अपने मालिक को , यह कभी नहीं कहेगी कि हम क्या खा सकते हैं, पी सकते हैं, पहन सकते हैं, और किस प्रकार से रहन सहन करेंगे. राम ना हिन्दू थे न मुस्लिम, और यदि राम राज्य में नास्तिक ही क्यों ना हो, राम का राजधर्म केवल सबको सुरक्षा और न्याय प्रदान करना था. उन्होंने कहीं नहीं कहा की उनके नाम पर इमारतें गिरायी जाएं. ऐसे लोग राक्षसः होते हैं, राम के धर्म के दुश्मन.

अभिनव भारत का दूसरा बिंदु होगा जवाबदेही.

अभिनव भारत में किसी भी सरकारी कर्मचारी की नौकरी पक्की नहीं होगी और यदि वह काम उचित रूप से नहीं करता तो उसको तुरंत नौकरी से निकाला जाएगा. इसी प्रकार से सारे विश्व में सरकारें चलती हैं.

विस्तार में क्या करना होगा?

अभिनव भारत बनाने के लिए हमें भारतीय संविधान को ध्यान से देखना पड़ेगा. उसमें पिछले 70 सालों में कई प्रकार के संशोधन हुए हैं जिनकी वजह से सरकार अपने कार्यक्षेत्र की सिमा के बहुत बाहर कार्य कर रही है. वह न केवल व्यापार कर रही है, वह किसानों को व्यापर करने से रोक रही है.

इस प्रकार की शक्तियां हम सरकार से वापस लेकर जनता को फिर सौंप देंगे.

यह रही अभिनव भारत के नक्शे की एक outline. विस्तार में इस नक्शे को भरने के लिए अच्छे अर्थशास्त्री और नीतिज्ञों से हम संपर्क करके इसको आगे बढ़ाएंगे.

IN THIS CONNECTION

My initial podcast in this connection is provided below. I’ll also make a video when I return to Melbourne.

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Silly people of India, stop praying to the Visa God. Just implement the SKC agenda.

In BFN I showed why Indians will continue to FLEE India – till the level of freedom in other countries is higher than India's.

In SKC agenda, the sole measure of success is this:

2.4    Our sole measure of success
There will be many milestones on this journey to success. All of them will need to be identified, planned, and monitored. 

But we ask the country to focus only on one ultimate indicator of success: the reversal of India’s brain drain. When thousands of our best and brightest halt their exodus from India, and when the world’s best graduates become desperate to migrate to India, then we will know we have succeeded. Not one day earlier.

That day, India will become well-entrenched as the beacon of liberty to the world, the greatest land of opportunity the world has ever seen.

Soon thereafter, India’s per capita income will rise to exceed the world’s highest, a foregone eventuality.

The sorry case of the Visa God

More details here.

The sad reality is that these people can easily make India BETTER than the West – IF ONLY THEY START THINKING.

Sorry, I'm a bit tired now, but those who have the energy to talk to Indian idiots about good policy can try. And please tell them that all their Modi-Shodis will only FURTHER ruin India since they have NO CLUE about the BASICS of governance. 

Of course, if the vast majority of Indians DON'T want to understand about good public policy despite your best efforts, and continue to elect corrupt ignorant rascals to the top positions, then you should get out of India – for the sake of your own sanity. 

 

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Fresh, complete proofing of Sone Ki Chidiya agenda now complete. Please download and share.

I finally found time to incorporate the extensive feedback received from Rakesh Pujari on each and every section of the SKC agenda.

This is his second full round of proofing (and asking 10s of questions). I much appreciate his contributions. He has a flair for good English and keeps probing the policies. 

I'm sure the result of his work will be appreciated across the country. Do download and share this version. Much easier to read, and with almost no typos.

PDF version below.

The latest Word version is available here. OpenDocument Text (ODT) here.

Consultation: We seek suggestions for improvement of the agenda from all readers. Please track changes in the Word version and send to sabhlok@gmail.com. (You can also send comments by email).

This is available here: http://sonekichidiya.in/

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