7th October 2018
Launch of New India Movement on 6 October by Swami Om Poorna Swatantra
I attended the launch of the Abhinav Bharat Abhiyan yesterday by Swami Om Poorna Swantara on his 81st birthday.
The event was attended by over 100 farm leaders from across north India.
I have rarely come across a man as good as Swami Om Poorna Swatantra. Although he doesn’t understand economics, he knows virtually everyone in India and has a deep understanding of the way Indians think. He is broadly supportive of the Sone Ki Chidiya total reform agenda that was prepared a few years ago.

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आह्वान
(भारत के प्रबुद्ध नागरिकों के प्रति))
भारत ऋषियों की तपो भूमि है। यहाँ का इतिहास आध्यात्मिक सत्य और सांस्कृतिक मूल्यों के द्वारा ही निर्धारित किया जाता है। इनमें उतार-चढ़ाव के साथ राष्ट्रीय जीवन में उत्थान-पतन आता रहता है। भारत के स्वतन्त्रता अभियान में इन्हीं मूल्यों ने राष्ट्र को एक नई ऊर्जा और शक्ति प्रदान की थी। जिसका परिणाम हुआ था भारत को स्वतंत्रता की प्राप्ति। लेकिन उसके बाद से इन्हीं मूल्यों का निरन्तर ह्रास होता जा रहा है-विकास का अर्थ केवल आर्थिक विकास बनकर रह गया है और उसमें भी सन्तुलन नहीं है। आध्यात्मिकता तो लुप्त प्राय ही हो गई है और एक नए प्रकार की सांस्कृतिक गुलामी राष्ट्र पर हावी होती जा रही है। हमारी युवा पीढ़ी भौतिकता की चमक-धमक में पश्चिम की गुलाम होती जा रही है। साइंस और टैक्नोलोजी की मदद से हमें भौतिक रूप से शक्तिशाली अवश्य बनना है लेकिन अपनी अस्मिता को खोकर नहीं। इस संकट की घड़ी में राष्ट्र के नव निर्माण का दायित्व धरती पुत्र और ऋषि पुत्र किसान पर आ गया है।
इस ऐतिहासिक कार्य को सम्पन्न करनें के लिए किसान को तीन काम करनें होंगेः
1. किसान को आत्म जागृति के द्वारा यह जानना होगा कि वह इस राष्ट्रीय परिवार का मालिक यानी मुखिया है। वह सबको सब कुछ देता है, वह जन्मजात दाता है। लोकतान्त्रिक व्यवस्था में भारत की जनसंख्या 70 प्रतिशत होने के नाते (खेती पर निर्भर होने के नाते गाँव का हर नागरिक किसान है) देश की सरकारें बनाता है। आर्थिक दृष्टि से रोटी देकर पूरे राष्ट्रीय परिवार का पालन-पोषण करता है और विकास के लिए देश को धन प्रदान करता है (खेत में किसान और कारखाने में उसका छोटा भाई मजदूर, दोनों भाई मिलकर देश को सारी दौलत प्रदान करते हैं)। इस प्रकार वोट, रोट और नोट (धन) देकर किसान राष्ट्रीय परिवार के मुखिया की भूमिका निभाता है। किसान का बेटा जवान अन्दर और बाहर से देश की रक्षा करता है। इस तरह से किसान और उसका परिवार (मजदूर और जवान को मिलाकर) ही देश का पालक-पोषक और रक्षक है। लेकिन दूसरी तरफ देखें तो वही मालिक किसान दर-दर की ठोकर खानें को मजबूर है। छोटे-छोटे समूह बनाकर यहाँ वहाँ चीखता-चिल्लाता रहता है लेकिन कोई सुनता नहीं। अन्ततः जब उसके जीने का अधिकार भी छिन जाता है तो आत्महत्या करके मृत्यु की शरण में चला जाता है। आखिर किसान की यह दुर्दशा क्यों ? इसका एक ही कारण है कि वह अपनी हैसियत को नहीं पहचानता कि वह इस देश का मालिक है।
2. किसान को दूसरा काम यह करना है कि उसको अपने किसान परिवार को राष्ट्रीय स्तर पर संगठित करके संख्या को शक्ति में बदलना होगा। आज किसान के पास देश में सबसे बड़ी संख्या तो है लेकिन वह सारी बिखरी हुई है। इसी के कारण किसान सबसे कमजोर और शक्तिहीन है और यही उसके सारे संकटों का कारण है। जब किसान अपने को राष्ट्रीय स्तर पर संगठित कर लेगा तो वह देश की सबसे बड़ी शक्ति बन जायेगा। तब वह न केवल अपना उद्धार कर लेगा बल्कि तब वह भारत राष्ट्र का भी नव निर्माण कर देगा।
3. जिस प्रकार से नया मकान बनाने के लिए एक नक्शे की जरूरत होती है उसी प्रकार से अभिनव भारत का निर्माण करनें के लिए एक नक्शे यानी Blueprint of New India की आवश्यकता है। नक्शे यानी Blueprint में राष्ट्रीय जीवन के सभी अंगों यानी पक्षों का चित्रण होना अनिवार्य है। इसमें आध्यात्मिक सत्य; भारतीय संस्कृति; नैतिक मूल्य; मानव का समग्र विकास करनें वाली शिक्षा पद्धति; समता और न्याय पर आधारित समाज व्यवस्था, सच्चे लोकतन्त्र पर आधारित नीचे गाँव से लेकर ऊपर राष्ट्र तक उठनें वाली सेवा आधारित राजनैतिक व्यवस्था और अन्त में प्रकृति का शोषण करनें वाली अर्थव्यवस्था के स्थान पर प्रकृति और मानव का पोषण करनें वाली (पारस्परिक पोषण करनें वाली) Symbiotic Model of Development पर आधारित अर्थव्यवस्था का समावेश होगा। यह केवल सिद्धान्त में नहीं बल्कि व्यवहार में इस पर कार्य करना होगा और यह कार्य सभी क्षेत्रों में एक साथ चलेगा। यह होगा अभिनव भारत के निर्माण का स्वरूप। सचमुच में हम इस अभिनव भारत के उदाहरण द्वारा विश्व के सम्मुख एक नई विश्व व्यवस्था का स्वरूप प्रस्तुत कर सकेंगे। यही मानव के सुरक्षित भविष्य के लिए आज के युग की आवश्यकता है।
इस अभियान का उदघाटन 6 अक्टूबर, 2018 को दिल्ली में किया जायेगा।
कार्यक्रम
समयः 6 अक्टूबर 2018, प्रातः 11 बजे
स्थानः सुरभि वाटिका, कॉपसहेड़ा-बिजवासन रोड़,
(कॉपसहेड़ा क्रोसिंग से 2 किमी रमेश नर्सरी के पास)बिजवासन, नई दिल्ली।
संयोजक :- राम कुमार अत्री
संरक्षक :- स्वामी ओमपूर्ण स्वतंत्र