Thoughts on economics and liberty

My email to Mr Hans Kluge of WHO, Europe re: adoption by WHO of the Malta approach

Your commendation of Malta’s approach

Dear Mr Kluge

I’m writing in my personal capacity. I appreciate your commendation of Malta’s approach – that too, from a senior WHO official.

Malta’s approach is truly wonderful – age-based, risk-based. I’ve been writing since 6 March about taking such an approach but most countries are adopting mass lockdowns (the worst being India).

Can you please escalate your recommendation so all nations start applying a risk-based approach? Millions will die and the world’s economy will be destroyed by these unthinking lockdowns.

My latest article: We must not flatten India order to flatten the curve.

Please note that even Neil Ferguson has confirmed personally to me that up to 60 per cent of lives can be saved by locking down the elderly. I’m trying to locate his model because I believe even more can be saved by adding those with preconditions (which is what I’ve been advocating).

Regards
Sanjeev Sabhlok

Sanjeev Sabhlok

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One thought on “My email to Mr Hans Kluge of WHO, Europe re: adoption by WHO of the Malta approach
  1. Dr. Pawan Kumar Aryan

    संघी देश विभाजन करके भारत भूमि का बलात्कार कर गए, संघी-हिन्दु हिंदुस्थान, संघी-मुसलमान पाकिस्तान, शहीदो ने मुहम्मद सिंह आज़ाद बनकर भारत भूमि को मेहनतकशों, दलितो, शूद्रो के खून पसीने से बनी भाई-चारे की प्रेम चादर से ढका। सावरकरी-जिन्हा संघी इसी प्रेम-चादर से नफरत करते थे, करते है और करते रहेंगे। इसी लिए देश के करोड़ो विस्थापित कामगार किस फ़ैक्टरि, कन्स्ट्रकशन, माल, मंडी, सड़क, दुकान, ट्रांसपोर्ट, कूरियर, होटल, ढाबा, हास्पिटल, घर, ठेकेदार, सर्विस इंडस्ट्री, सॉफ्टवेर इंडस्ट्री आदि मे कामरत थे, लेबर डिपार्टमेंट ये सारा डाटा सार्वजनिक नहीं करता, जबकि कानूनन यह सारे आंकड़े लेबर अधिकारियों के पास है । खेती हर मजदूरो का डाटा हर ग्राम पंचायत के पास है पर पंचायते भी इस डाटे को सार्वजनिक नहीं करती। संघी सरकार की मंशा से हो रहा है । संघी सावरकरी सरकार सावरकर की मनुवादि चाणक्य नीति को फॉलो करती है, संविधान तो आईसीयू मे भर्ती है। यह सब एक बड़ी साज़िश है, ताकि भारत भूमि की लाज़ बचाने वाले सच्चे लोग इतिहास के पन्नों पर सवर्ण अक्षरो मे अंकित न हो, और खून पसीने से बनी आपसी भाईचारे की चादर को फाड़ने नोचने वाले गद्दारो की पक्की शिनाख्त न हो सके ।
    कोरोना वाइरस से लड़ाई तभी जीती जा सकती है जब सच लिखा जाएगा और झूठ का पर्दाफाश होगा । सच लिखना और बोलना, प्रेम करना और प्रेम से जीना जिंदगी जीने आधारभूत शासवत वैज्ञानिक तथ्य है, प्रेम के इस प्राकृतिक-वैज्ञानिक तथ्य को कोई भी गपोड़ा (ट्रम्प, इमरान, मोदी) झुठला नहीं सकता । धोखा देकर, झूठ बोलकर कोर्ट कचहरियों को खरीद कर, गोगोई की बोली लगाकर, मीडिया को हाँककर चुनाओ जीतने का जाल बिछेगा संघी-जिन्हा-सावरकारी मानवता के विरुद्ध साज़िश जरूर करेंगे। टलेंगे नहीं।
    बस यह समझ मे आ जाए तो इस धरती को खूबसूरत और बेहतरीन बनाने के सपने को जमीन से जुड़े करोड़ो सच्चे, मेहनतकश बासिन्दे खुद-ब-खुद सच्चाई की राह को पकड़ कर आगे बढ़ जाएँगे, सच लिखेंगे-पढ़ेंगे और सच पहचान जाएंगे । मनुवादि संघी जिन्हा-सावरकरियों और साम-दाम-दंड-भेद के चाणक्यो ट्रम्प-ली के षड्यंत्रो के शिकार होने से भी समय रहते बच जाएंगे। शायद तभी तमाम सच्ची सोच रखने लोग आने वाली पीढ़ियो को एक सुंदर संसार देने की जद्दोजहद मे लग जाएंगे और विजयी होंगे।
    सच्चे, स्पष्ट, बेबाक, बेखौफ़, शिक्षित, इन्फॉर्म्ड, कर्मशील, दूरद्रष्टा, निस्वार्थ, वैज्ञानिक चेतना से परिपूर्ण नेता और काबिल डाक्टर समय की मांग थी, पर दुनियाँ का ये मंजर देख, और वाइरस कहर के इस दौर मे, हमारे बच्चे मुँहबाये आसमान देख रहे है।

     

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