Thoughts on economics and liberty

Some observations/ questions on the agenda of Bundelkhand Kisan Sanghathan

I received this note from Avnish Pratap, a close colleague of Late Sharad Joshi. There are some elements of this that I fully agree with, but there are a few that I’m not clear why these are being raised.

Things I agree with are in dark green. Things I don’t agree with or have questions about, are in red.

1. 2014 में प्रधानमंत्री बनते ही आपने अपनी ही पार्टी के प्रदेश के मुख्यमंत्री को कहा था कि ₹100 बोनस दोगे तो अपना पैसा दो, अपने गोदाम में रखो. आपने उन्हें ना तो ₹100 बोनस देने दिया और ना ही आपने ₹50 दिए. किसानों को डेढ़ सो रुपए क्विंटल की होनी हुई. [Sanjeev: Unclear what is being said here] ऐसा क्यों?

2. बकौल मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री उन्होंने 2014 में सात करोड़ 30 लाख क्विंटल गेहूं खरीदा आपकी सोच से किसानों की 1 अरब से ज्यादा की जेब कट गई थी. [Sanjeev: Once again, unclear, but shouldn’t we be pushing back against purchase of any grain by government?] आखिर क्यों?

3. आपने 15 अगस्त 2016 में लाल किले से देश के बड़े भू-भाग में अकाल की महज चर्चा की. किसानों को ज्यादा धान बोने पर धन्यवाद किया, किंतु दालें आयात कर आपने 7000 से 8000 की दालों के दाम 3000 में गिरा दिए. [Sanjeev: We either want total freedom or we don’t. I agree the government should not be involved in imports, but the idea is to demand total freedom to export and import agricultural produce]

4. आपके कृषि मंत्री कहते हैं कि किसान प्रेम प्रसंग को शराब के कारण आत्महत्या करता है, फिर भी वह मंत्रिमंडल में बने हुए हैं. ऐसा क्यों? [Fully agree]

5. आप कर्ज मुक्ति की योजना राज्य सरकारों को बनाने को कहते हैं जो केवल कुछ सरकारी क़र्ज़े छोड़ते हैं, राष्ट्रीयकृत बैंकों के कृषि कर्जे का क्या होगा, क्या यह विभिन्नता असंवैधानिक नहीं है? ऐसा क्यों? [I don’t like this focus on loan waiver. The idea of not repaying loans is only made feasible because of socialist India’s public sector banks. This entire system is flawed. We must get the government out of all business activity.]

6. राज्य सरकारें कर्ज मुक्ति की सीमा तय करती है. ज्यादा अनाज उत्पादन करने वालों से भेदभाव क्यों? [As above]

7. आप की सरकार के देश व विदेश में विश्व व्यापार संगठन में दोहरे चेहरे क्यों? आप की सरकार के विश्व व्यापार संगठन के आंकड़े गेहूं पर ₹650 या व धान पर ₹380 की जेब काटती है. ऐसा कहते हैं जिसके प्रावधानों के अनुसार खुले बाजार के गेहूं का दाम 2750 होता है, आपकी सरकार 1850 देती है. ऐसा क्यों? [Sanjeev: Once again unclear, but seems suspiciously like a complaint about government procurement price. Let’s ask government to get out of purchasing grain]

8. आपकी सरकार खुले बाजार के मुकाबले 1 क्विंटल गेहूं पर ₹900 की जेब काट रही है [Sanjeev: what is the meaning of this?]. ऐसा क्यों?

9. आप की सरकार डब्ल्यूटीओ में 17 फसलों के आंकड़े देने से बच रही है, मात्र 4 फसलों के आंकड़े दे रही है. ऐसा क्यों? [Agreed – although I don’t know the details]

10. आप की सरकार केंद्रीय Cattle Trespass Act लागू नहीं कर रही है, कहीं कांजी हाउस [Sanjeev: this is unclear] नहीं है, गाय प्रेमियों की गाय किसानों की फसलें रवा रही है. ऐसा क्यों? [Mostly agree with this]

11. आप की सरकार के वन्य प्राणियों के प्रेमी मंत्री किसानों पर तरस नहीं खा रहे, बंदर, मोर, जंगली गायें किसानों की फसलें खा रही हैं, उन्हें जंगल की बाढ़ लगा कर क्यों नहीं रखा जा रहा है? ऐसा क्यों?  [Agree]

12. आपने जी जो स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने की बात की किंतु किसान और उसके परिवार की मजदूरी नहीं जोड़ रहे हैं, ऐसा क्यों? [Disagree. We must oppose all procurement and “payment” of farmers by government. That’s not its job.]

13. आपकी लागतो के आंकड़े कई साल पुराने हैं नवीनतम नहीं, ऐसे में दाम लाभकारी कैसा होगा? ऐसा क्यों? [This seems suspiciously related to the Swaminathan report. No. Let’s stop government procurement]

14. श्री स्वामीनाथन ने कृषि मूल्य निर्धारण में प्राकृतिक विपदा का फैक्टर नहीं जोड़ा. बकौल एक समय भारत सरकार के कृषि मंत्री का लोकसभा में लिखित बयान है कि चार फसलों में से लगातार तीन फसलें प्राकृतिक विपदा से मिट जाती है. किसानों को चौथी फसल मिलती है. लागत तीन गुनी क्यों नहीं की जाती? ऐसा क्यों? [No. As above]

15. किसानों को फैसला फसल बीमा का 2-4 व ₹10 मिलने पर शासन को शर्म नहीं आती? ऐसा क्यों? [No. No subsidy of any sort for the general farmer. Only once someone falls below extreme poverty, then direct transfer of social minimum funds]

16. किसानों को कम वोल्टेज की बिजली वह भी रात में मिलती है. क्या किसानों के सोने का अधिकार नहीं? कम वोल्टेज पर मीटर जलने पर अतिरिक्त भार क्यों? [Agree – but farmers must pay full price for electricity – which must be supplied by private competitive companies]

17. किसानों की फसल बीमा की किश्त स्वयं सरकार राष्ट्रीय क्षति मान कर क्यों नहीं भरती? किसानों पर अतिरिक्त भार क्यों? [No.]

18. नोट बंदी से किसानों की संपत्तियों में के दाम गिर गए, किसानों की जमीन खरीदने वाला कोई नहीं, कर्जा आप छोड़ेंगे नहीं, तो क्या किसान आत्महत्या नहीं करेगा? ऐसा क्यों? [Mostly agree with this – but don’t like the loan waiver issue]

19. आप स्वयं पूरी दुनिया घूम रहे हैं किंतु कृषि उत्पादन के व्यापार हेतु सीमाएं नहीं खोल रहे हैं. ऐसा क्यों? [FULLY agree with this]

20. खुली करण के विश्व माहौल के विपरीत आप अधिक से अधिक नियंत्रण की सरकार चलाते हैं. ऐसा क्यों? नोटबंदी, जीएसटी जनता की जेब पर डाका नहीं? ऐसा क्यों?  [Mostly agree with this]

21. आपकी केंद्र सरकार के किसानों को अनाज के दाम न लेने-देने के उपक्रम व प्राकृतिक विपदाओं से एनपीए हुए ऋण खातों के विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकसी के ऋणों को आपके वित्त मंत्री समकक्ष क्यों रख रहे हैं? उनका सेटेलमेंट नहीं. ऐसा क्यों? [I don’t quite see why this issue is being raised. All public sector banks should be shut down since these are leading to massive corruption]

22. छतरपुर जिले में बिना अधिग्रहण के रवोंपताल में किसान की 1968 से डुबाइ जा रही 200 एकड़ जमीन पूर्व प्रधानमंत्री स्व.अटल बिहारी वाजपेई के निर्देश के बावजूद अधिग्रहित नहीं है, मुआवजा नहीं. ऐसा क्यों? [Sanjeev: Unclear]

Sanjeev Sabhlok

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