Thoughts on economics and liberty

भारतीयों की झूठी शान

भारत एक समुद्र जैसा है, यह इतना बड़ा है कि आदमी उसमें अपने कई जीवन बिता सकता है, बाकी दुनिया से दूर. परंतु विश्व  के मुकाबले भारत एक बड़ी झील समान है. भारत की असलियत सिर्फ बाहर जाकर ही समझ आती है.

भारत में बैठे हुए लोग बाकी देशों की कई बार आलोचना करते हैं, परंतु यह सत्य है कि Western देशों में आम आदमी की हालत भारत के आम आदमी से बहुत बेहतर है.

एक साधारण से छोटे से देश को ले लीजिए, जापान. मैं पढ़ रहा था कि World War II के पहले भी जापान में 10 एयरक्राफ्ट कैरियर थे. भारत के पास अभी भी एक ही एयरक्राफ्ट कैरियर है. एयरक्राफ्ट कर्रिएर की तुलना एक किस्म से उचित नहीं, पर आम आदमी की आमदनी देखें तो भी जापान का आम आदमी भारत के आम आदमी से 10 गुना ज़्यादा कमाता है.

अब यह सवाल उठता है कि जापान भारत के जैसा महान देश से आगे कैसे निकल गया?

World War II में हार खाने के बावजूद जापान ने बहुत ही शीघ्र अपनी टेक्नोलॉजिकल पावर को आगे बढ़ाया और अब जापान प्रत्येक टेक्नोलॉजी की चरम सिमा पर है.

मैंने कहीं वेस्टर्न जर्मनी के World War II के बाद के टूटे-फूटे शहरों के चित्र देखे थे. पर हम सब जानते हैं कि शीघ्र ही वेस्टर्न जर्मनी अपने शहरों की मरम्मत कर के टेक्नोलॉजिकल चरम सिमा पर फिर से पहुंच गया.

ये देश इतना जल्दी इतना आगे कैसे पहुंच जाते हैं?

उसके अलावा यह भी सोचना पड़ेगा कि जो चीजें इस्तेमाल करते हैं जैसे कि मोबाइल फोन, वगैरह – ये सब भारत में इंवेंट क्यों नहीं हुए? हम ये सारी चीजें बाहर के देशों से क्यों लेते हैं और हमारे लोग इन चीज़ों का आविष्कार क्यों नहीं करते?

एक और बात का देश के बाहर जाकर ही पता चलता है – जैसे सड़कें और बिजली, वगैरह – यह सभी लोगों को आराम से उपलब्ध होती हैं. भारत में हम देखते हैं कि basic चीजें – जैसे सड़क, बिजली और पानी – यह भी मिलना मुश्किल है.

उसके अलावा भारत के सड़कों के किनारों गंदगी के ढ़ेर देखने को मिलते हैं, पर बाहर के देशों में साफ सुथरा माहौल मिलता है.

हम भारतीय एक झूठी शान लेकर अपने आप को बड़ा देश मानते हैं. सच्चाई तो यह है कि हम बाकी देशों से कम से कम 10 गुना पीछे हैं और उसके अलावा हमारे यहां पर न्यूनतम सुरक्षा, न्याय और समृद्धि के साधन हर व्यक्ति को उपलबब्ध नहीं हैं.

भारतीयों को झूठी शान छोड़कर असलियत का जानना जरूरी है.

जब हम असलियत की तरफ ध्यान देंगे तो एक सवाल उठेगा कि यह सब क्यों हो रहा है?

इस सवाल का जवाब देने के लिए स्वर्ण भारत पार्टी बनी है और उसके मेनिफेस्टो में इन सब बातों के बारे में विस्तार में लिखा हुआ है. एक शब्द में: समाजवाद.

Sanjeev Sabhlok

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3 thoughts on “भारतीयों की झूठी शान
  1. Mahesh kumar maurya

    बहुत अच्छा हिंदी में आपने लिखा है और संक्षेप में कुछ बातों को प्रदर्शित किया है जो कि मेनिफेस्टो से मिलता-जुलता है

     
  2. Dr. Pawan Kumar Aryan

    क्या यह, संजीव जी, आपने लिखा ?

    बहुत ही अच्छा है आम भारतीय की समझदानी के अनुरूप |

    आजकल शशी थरूर भी हिंदी में लिख रहा है, ट्वीट करता है |

    कृपया मेरे फोंन न. 9416875628 पर whatsapp करना ताकि अपने सारे ग्रुप्स में डाल सकू |

    मुझे ईमेल से व्हाताप्प करना नही आता |

     
  3. Sanjeev Sabhlok

    Thanks, Pawan. I’ve dictated this (not written, although I used Google transliteration to finish up).

    I’m afraid I don’t join any Whatsapp groups nor communicate with anyone who is not an ACTIVE member of SBP.