One-stop shop to make India 20 times richer

The ultra-socialist “Indian Business Party”

Someone pointed out to me that a new party called Indian Business Party has been registered by the ECI some time ago.

Here’s a news report in Economic Times.

Its cited policies include “compulsory draft in armed forces”

Its founder is V.K. Bansal. He has written on Linkedin about the party.

The party has a Facebook page. Looks like the party is contesting Delhi MCD elections.

Anyway, I spent some time on its party website to review its policies. Unfortunately, the website is sketchy with 5-6 one-line policies.

Most of these are ultra-socialist policies. Not one of them has any reference to any governance reform. And I disagree with all of them (at least the one’s I looked at).

Not worth spending even half a further minute on this party.

Education policy

शिक्षा सभी के लिए अनिवार्य होनी चाहिए, सरकारी स्कूलों में शिक्षा पूरी तरह निशुल्क होनी चाहिए, जो विद्यार्थी सरकारी स्कूल में शिक्षा ग्रहण करते है उन्हें सरकारी, अर्ध सरकारी नौकरी की गारंटी, योग्यतानुसार होनी चाहिए। मनेरगा सिर्फ उन्ही परिवारों को मिले जिनके बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे है ।
Labour policy
औद्योगिक श्रमिक सबसे ज्यादा निश्चिंतता के माहौल में जीवन यापन करता है। तमाम उम्र एक मकान की हसरत लिए हुए वह दुनिया से विदा हो जाता है। यदि मंहगाई की दर 8% है तो उसका पारिश्रिमिक उक्त अनुपात में नहीं बढ़ता। यदि श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा मिल जाए तो वह अपना जीवन शांति के साथ निकाल सकता है। हमारा प्रस्ताव है कि ईपीएफ का कॉर्पस जो लगभग छह लाख करोड़ है, से शहरी श्रमिकों के लिए आवास बनाए जाएं तथा श्रमिकों को उक्त मकान में उसकी तमाम उम्र के लिए रहने का अधिकार मिल जाए।

Agriculture policy

कृषि क्षेत्र के सुधार के लिए यह भी आवश्यक है कि केन्द्र सरकार भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रख कर कृषि क्षेत्र (Zone) बनाए तथा उक्त स्थान में अनुकूल खेती को बढ़ावा दें। उदाहरण के लिए महाराष्ट्र में सूखे के चलते वहां वही फसल होगी जिसमे सिंचाई की कम आवश्यकता हो। आज महाराष्ट्र में गन्ने एवं कपास की सर्वाधिक खेती है, दोनों फसलों को पानी की काफी जरूरत होती है, राज्य सूखाग्रस्त है, ऐसी दशा में खेती कैसे होगी।

विज्ञान के इस काल में कृषि बहुत पीछे रह गई है। व्यापार की उन्नति के लिए समृद्ध खेती का होना आवश्यक है| कृषि उत्पादन का सम्पूर्ण विश्लेषण हो तथा किसानों को फसल उगाने से पहले शिक्षित किया जाए।

Sanjeev Sabhlok

View more posts from this author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Notify me of followup comments via e-mail. You can also subscribe without commenting.